(अन्नपूर्णागिरी जी)
श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी, उज्जैन परम पूज्य श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर साध्वी वर्षा जी (अन्नपूर्णागिरी जी) का जन्म 6 अगस्त 1993 को रक्षा बंधन के पावन पर्व पर मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के छोटा बैरसिया ग्राम में एक प्रतिष्ठित ब्राह्मण नागर परिवार में हुआ। आपके दादाजी परम श्रद्धेय पंडित स्वर्गीय भैरवप्रसाद जी नागर अपने क्षेत्र के प्रसिद्ध कथा वाचक एवं धर्म प्रचारक थे, जिनसे आपको धार्मिक संस्कार एवं आध्यात्मिक प्रेरणा प्राप्त हुई। आपका बाल्यकाल मां बगलामुखी की पावन नगरी नलखेड़ा में व्यतीत हुआ। आपने सरस्वती शिशु विद्या मंदिर से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। बाल्यकाल में आपका नाम "रक्षा नागर" था, किंतु एक आयोजन के दौरान आयोजकों की त्रुटिवश आपका नाम "वर्षा नागर" घोषित हुआ और यही नाम आगे चलकर देशभर में प्रसिद्ध हो गया। मात्र 6 वर्ष की अल्पायु से ही आपने श्रीराम कथा, श्रीमद्भागवत कथा, श्रीशिवपुराण एवं धर्म जागरण के माध्यम से सनातन संस्कृति का प्रचार-प्रसार प्रारंभ कर दिया। आपका प्रथम धार्मिक आयोजन अपनी कुलदेवी भैंसवा माता जी के पावन धाम में सम्पन्न हुआ। आज तक आप 800 से अधिक श्रीमद्भागवत कथाओं एवं धार्मिक आयोजनों के माध्यम से भारत सहित विदेशों में सनातन धर्म की अलख जगा चुकी हैं। सिंगापुर, थाईलैंड, मलेशिया सहित भारत के 22 राज्यों में आपके कथा एवं धर्म जागरण कार्यक्रम आयोजित हो चुके हैं। आपकी ओजस्वी वाणी एवं प्रेरणादायक कथाओं से प्रभावित होकर अब तक 1 लाख से अधिक युवाओं ने नशामुक्त जीवन अपनाने का संकल्प लिया है। समाज में नैतिक मूल्यों, संस्कारों एवं राष्ट्रभक्ति की भावना जागृत करने में आपका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। 20 सितंबर 2007 को श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर पूज्य श्री अवधेशानंद गिरि जी महाराज ने आपको अपनी मानस पुत्री के रूप में सम्मानित करते हुए विशेष उपाधि प्रदान की। तत्पश्चात 5 जुलाई 2023 को वाराणसी स्थित कैलाश मठ में पूज्य श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर आशुतोषानंद जी महाराज के सान्निध्य में आपने संन्यास दीक्षा ग्रहण कर अन्नपूर्णागिरी नाम प्राप्त किया। 4 जनवरी 2024 को उज्जैन की पावन भूमि पर 13 अखाड़ों के संत-महात्माओं, अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पूज्य महंत श्री रविन्द्र पुरी जी महाराज एवं अन्य महंतों के सान्निध्य में आपका भव्य पट्टाभिषेक सम्पन्न हुआ तथा आपको "महामंडलेश्वर" की दिव्य उपाधि से विभूषित किया गया। आज साध्वी वर्षा जी (अन्नपूर्णागिरी जी) सनातन धर्म, राष्ट्र चेतना, युवा जागरण, नशामुक्ति अभियान एवं भारतीय संस्कृति के संरक्षण हेतु निरंतर समर्पित भाव से कार्य कर रही हैं। आपकी कथाएं केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज निर्माण और मानव कल्याण का एक सशक्त माध्यम बन चुकी हैं। "धर्मो रक्षति रक्षितः" — धर्म की रक्षा करने वाला स्वयं धर्म द्वारा संरक्षित होता है।
श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी, उज्जैन की प्रेरणा एवं परम पूज्य श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर साध्वी वर्षा जी (अन्नपूर्णागिरी जी) के पावन मार्गदर्शन में हमारा उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन करना नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, भारतीय संस्कारों एवं राष्ट्र चेतना का व्यापक प्रचार-प्रसार करना है। हमारे प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं— * देश-विदेश में श्रीमद्भागवत कथा, श्रीराम कथा, शिवमहापुराण एवं अन्य धार्मिक आयोजनों के माध्यम से सनातन धर्म का प्रचार। * युवाओं को नशामुक्त, संस्कारित एवं राष्ट्रभक्त जीवन के लिए प्रेरित करना। * भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपराओं एवं धार्मिक मूल्यों का संरक्षण एवं संवर्धन। * बच्चों एवं युवाओं में नैतिक शिक्षा, चरित्र निर्माण एवं आध्यात्मिक जागरण का प्रसार। * गौसेवा, संत सेवा, धर्म सेवा एवं जनकल्याणकारी गतिविधियों का संचालन। * समाज में प्रेम, सद्भाव, सेवा एवं मानवता के मूल्यों को सुदृढ़ करना। * धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों के माध्यम से जन-जागरण अभियान चलाना। * सनातन धर्म से जुड़े प्रामाणिक ज्ञान को डिजिटल माध्यमों द्वारा देश-विदेश तक पहुँचाना। * परिवारों में संस्कार, सदाचार एवं आध्यात्मिक जीवनशैली को प्रोत्साहित करना। * मानव सेवा को ही ईश्वर सेवा मानते हुए समाज के प्रत्येक वर्ग के कल्याण हेतु निरंतर कार्य करना। हमारा विश्वास है कि जब समाज धर्म, संस्कार और सेवा के मार्ग पर चलता है, तभी एक सशक्त, समृद्ध एवं जागरूक राष्ट्र का निर्माण होता है।
एक ऐसे समाज का निर्माण करना है जहाँ सनातन संस्कृति केवल परंपरा बनकर न रह जाए, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन का आचरण बने। हम मानते हैं कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि सत्य, सेवा, करुणा, सदाचार, राष्ट्रप्रेम और मानवता का जीवन जीना ही वास्तविक धर्म है। हमारा लक्ष्य है कि भारत की प्राचीन वैदिक परंपराएँ, ऋषि-मुनियों का ज्ञान और भारतीय संस्कृति की गौरवशाली विरासत आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित एवं सशक्त रूप से पहुँचे। हम चाहते हैं कि प्रत्येक युवा नशामुक्त, संस्कारित, आत्मविश्वासी एवं राष्ट्र के प्रति समर्पित बने। प्रत्येक परिवार में धार्मिक संस्कार, नैतिक मूल्य और आध्यात्मिक चेतना का विकास हो तथा समाज में प्रेम, एकता, सद्भाव और सेवा की भावना निरंतर बढ़ती रहे। डिजिटल युग में हमारा प्रयास है कि सनातन धर्म के प्रामाणिक संदेश, प्रेरणादायक प्रवचन, धार्मिक ज्ञान एवं भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर विश्व के प्रत्येक कोने तक सरल और प्रभावी रूप में पहुँचे। **"धर्मो रक्षति रक्षितः"** के दिव्य संदेश को आत्मसात करते हुए हम धर्म, संस्कृति, राष्ट्र और मानवता की सेवा को अपना सर्वोच्च कर्तव्य मानते हैं तथा इसी उद्देश्य के साथ निरंतर आगे बढ़ रहे हैं।
हमारी संस्था की सफलता के पीछे समर्पित व्यक्तियों का योगदान है।
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उन लोगों की कहानियाँ जिनके जीवन को हमने प्रभावित किया है
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